गणतंत्र पर तिरंगा सारी दुनिया में फहराऐं।
भारत मां को बसंत पंचमी की चूनर पहनाऐं।
अपनी सारी उम्र वतन को देकर चले गए वो।
भारत मां के उन लालों को आओ शीश नवाऐं।
छोड़ गुलामी की भाषा हम हिंदी को अपनाऐं,
गणतंत्र पर तिरंगा सारी दुनिया में फहराऐं।
देश के युवा दूर जा रहे हैं अपनी संस्कृति से,
उन्हें नशीली चकाचौंध के घर से बाहर लाऐं,
गीता,रामायण की पावन खुशबू से महकाऐं।
गणतंत्र पर तिरंगा सारी दुनिया में फहराऐं।
खुशहाली की हरियाली निर्धन पौधों पर आये,
नफरत का मौसम मेरे भारत में कभी ना आए।
बैर भाव को छोड़ प्रेम से सबको गले लगाऐं।
गणतंत्र पर तिरंगा सारी दुनिया में फहराऐं।
भारत मां को बसंत पंचमी की चूनर पहनाऐं।
गीतकार-अनिल भारद्वाज एडवोकेट ग्वालियर