जानकारी के अनुसार कंपनी ने एक ऐसा एप तैयार किया है, जिस पर ही बिजली चोरों के डिजिटल हस्ताक्षर लिए जाएंगे और प्रकरण रियल टाइम में बिजली साफ्टवेयर के सर्वर में दर्ज हो जाएगा। इससे बिजली कर्मचारी भी बिल में कोई गड़बड़ी नहीं कर पाएंगे। यह एप जीपीएस से जुड़ा है। जिसमें पंचनामों का दिन, समय व तारीखें सभी स्वत: दर्ज हो जाती हैं।
बिजली अफसरों को तीन माह में लाइन लास को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए कहा गया है। बिजली चोरी बहुल क्षेत्रों में सघन चेकिंग अभियान के साथ बकाया राशि की वसूली भी होगी। अभी भोपाल में कई क्षेत्रों में 45 प्रतिशत तक बिजली चोरी होती है। पुराना शहर इसमें सबसे आगे हैं। 15 प्रतिशत के लास को तकनीकी लास मानते हैं। अधिकारियों का कहना है कि बिजली चोरी रोकने के लिए डिजिटल पंचनामे की प्रक्रिया को सख्ती से लागू किया जा रहा है। एप पर ही पूरा प्रकरण दर्ज होगा। इसमें किसी तरह का हेरफेर नहीं हो सकेगा। अभी पंचनामा आफलाइन बनाए जाते हैं, जिसकी एक प्रति संबंधित व्यक्ति को भी उपलब्ध कराई जाती है।