- चीन की आपत्ति दरकिनार कर मोदी सरकार ने फ्रंटियर हाइवे को बनाने की दी मंजूरी

चीन की आपत्ति दरकिनार कर मोदी सरकार ने फ्रंटियर हाइवे को बनाने की दी मंजूरी


1748 किलोमीटर लंबा हाइवे 2027 तक तैयार होगा 


नई दिल्ली । मोदी सरकार ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास सबसे चुनौतीपूर्ण और रणनीतिक परियोजना अरुणाचल प्रदेश में फ्रंटियर हाईवे पर काम शुरू कर दिया है। 1748 किलोमीटर लंबे एनएच-913 हाईवे के 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने इस परियोजना के लिए पहली निविदाएं आमंत्रित कर दी हैं। हालांकि सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) ने अभी इसकी लागत नहीं जाहिर की गई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक अलग-अलग चरणों में परियोजना पर 40 हजार करोड़ की लागत आने का अनुमान है। हाईवे भूटान बॉर्डर के पास स्थित तवांग से शुरू होकर भारत-म्यांमार सीमा पर विजयनगर में समाप्त होगा। यह राजमार्ग भारत-तिब्बत-चीन और म्यांमार सीमा के करीब से गुजरेगा। चीन एलएसी से अपनी ओर बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है, फ्रंटियर हाईवे को इसी का जवाब माना जा रहा है।

India China Arunachal Pradesh Dispute Latest News: तेजी पर अरुणाचल फ्रंटियर  हाईवे का काम बुरी तरह फंसने वाला है चीन भारत के सामने नहीं टिक नहीं पाएगा

 

 चीनी सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रखने और संघर्ष की स्थिति में सुरक्षा बलों, हथियारों और रसद सामग्री की सीमा पर शीघ्र पहुंच सुनिश्चित करने के लिए इस परियोजना की रूपरेखा वर्ष 2016 में बनाई गई थी। इसके बाद से ही चीन इस पर आपत्ति जता रहा है।2016 में प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद चीन ने इस पर जोरदार आपत्ति जाहिर की थी। इस लेकर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंग ली ने कहा था कि जब तक दोनों देशों के बीच चल रहे सीमा विवाद का समाधान नहीं हो जाता है तब तक भारतीय पक्ष को ऐसा कोई भी कदम उठाने से बचना चाहिए, जिससे हालात और खराब होने की स्थिति बने। हालांकि भारत ने अपने सामरिक हितों को ध्यान में रखकर चीन की आपत्ति को दरकिनार कर दिया।

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रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने जो पहली निविदाएं आमंत्रित की है, उनकी लागत करीब 2,200 करोड़ रुपए है। इस प्रोजेक्ट के तहत एलएसी से सटे हुनली और हयुलियांग के बीच लगभग 121 किमी लंबे एक महत्वपूर्ण राजमार्ग का निर्माण किया जा रहा है। वहीं, हुनली और इथुन के बीच 17 किमी लंबा रणनीतिक पुल और टुटिन से जिदो तक 13 किमी लंबी सडक़ का निर्माण किया जा रहा है।प्रस्तावित राजमार्ग के बारे में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा था, ‘1962 एक इतिहास था और यह कभी नहीं दोहराया जाएगा। 1962 में परिदृश्य बहुत अलग था। क्षेत्र का बुनियादी ढांचा खराब होने के बावजूद भारतीय सेना ने बहादुरी से लड़ाई लड़ी और देश की रक्षा के लिए हजारों जानें कुर्बान की। लेकिन आज हम वहां नहीं हैं जो 1962 में थे।

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