नई दिल्ली । जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि यदि परिवार जैसी संस्था को बचाना है तो पुरुषों को अहम छोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि परिवार में अगर महिलाओं की पहचान खत्म होगी तो एक ना एक दिन शादी का टूटना तय है। हर सफल व्यक्ति के पीछे परिवार होता है। महिलाओं की भूमिका को शादी में कमतर नहीं आंका जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बीवी नागरत्ना ने शुक्रवार को कहा कि परिवार संस्था और शादी को बचाना जरूरी है
लेकिन इसके लिए पुरुषों को अपने दूसरे से अहम समझने वाले व्यक्तित्व को छोड़ना होगा। उन्होंने ये भी कहा कि शादी में महिलाओं की अहमियत को भी मानना पड़ेगा और उन्हें कमतर समझना बंद करना होगा। बता दें कि 28वें जस्टिस सुनंदा भंडारे मेमोरियल लेक्चर में उन्होंने अपने संबोधन में यह बात कही। जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि महिला और पुरुष दोनों शादी के दो अहम स्तंभ हैं। इसमें परिवार की अहम भूमिका होती है लेकिन घरेलू हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पुरुषों को अपने आप को अहम मानने वाले व्यक्तित्व को छोड़ना पडे़गा। उन्होंने कहा कि शादी और परिवार संस्था का बना रहना जरूरी है और यह खुशी और परिवार और महिलाओं की बेहतरी पर आधारित होना चाहिए।
जस्टिस ने कहा कि परिवार में अगर महिलाओं की पहचान खत्म होगी तो एक ना एक दिन शादी का टूटना तय है। हर सफल व्यक्ति के पीछे परिवार होता है। महिलाओं की भूमिका को शादी में कमतर नहीं आंका जाना चाहिए। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि शादी टूटने का असर बच्चों पर भी पड़ता है। देश के कार्यबल में महिलाओं की स्थिति पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि महिलाओं के गर्भवती होने पर उनसे पूछा जाता है कि उन्हें अंतिम बार पीरियड कब हुआ था। निजी क्षेत्र में अगर कोई महिला बच्चे को जन्म देने के लिए छुट्टी लेती है तो जब वह वापस आती है तो वह पाती है कि उसकी जगह कोई और नियुक्त कर लिया गया है, यह नहीं चल सकता।