बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की राज्य में शराबबंदी को लेकर की गई टिप्पणियों के बाद राजनीतिक माहौल काफी गरमा गया है।
कुछ समय से, शराबबंदी बिहार की राजनीति में एक अहम मुद्दा बनी हुई है। राज्य के भीतर शराबबंदी को लेकर राजनीतिक चर्चा एक बार फिर तेज़ हो गई है। जनता दल (यूनाइटेड)—JDU—और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर बढ़ गया है। इस ताज़ा विवाद के केंद्र में शराब कंपनियों से कथित तौर पर मिले चुनावी चंदे का मामला है।
खास तौर पर, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोमवार को नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार को राज्य में बढ़ते भ्रष्टाचार के लिए ज़िम्मेदार ठहराया था, और इसका कारण शराबबंदी को बताया था। इस बयान के बाद, JDU ने मंगलवार को तीखी प्रतिक्रिया दी। JDU के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने दावा किया कि RJD शराब कंपनियों से चंदा लेती है, इसीलिए वह शराबबंदी नीति पर सवाल उठा रही है।
**RJD को शराब कंपनियों से कितना चंदा मिला?**
JDU के अनुसार, जुलाई 2023 से जनवरी 2024 के बीच, RJD को शराब कंपनियों से लगभग ₹46.64 करोड़ का चंदा मिला। इसी आधार पर पार्टी ने RJD के इरादों पर सवाल उठाया है। JDU का तर्क है कि, इन परिस्थितियों में, शराबबंदी के खिलाफ बयान देना राजनीतिक फायदे के लिए उठाया गया कदम लगता है। पार्टी ने कहा कि बिहार में 2016 से ही शराब पर पूरी तरह से प्रतिबंध लागू है, और इसके लागू होने के बाद से समाज में कई सकारात्मक बदलाव आए हैं।
JDU के अनुसार, विभिन्न संस्थाओं द्वारा किए गए सर्वेक्षणों से पता चलता है कि बड़ी संख्या में लोगों ने इस कानून का समर्थन किया है। इसके विपरीत, तेजस्वी यादव ने हाल ही में शराबबंदी कानून को पूरी तरह से विफल बताया था। उन्होंने दावा किया कि शराबबंदी के कारण राज्य में एक समानांतर, अवैध व्यवस्था खड़ी हो गई है। तेजस्वी यादव का यही बयान इस बढ़ते राजनीतिक विवाद की मुख्य वजह बना है।
*RJD को पहले आपस में सलाह-मशविरा करना चाहिए: JDU**
JDU के मुख्य प्रवक्ता और विधान परिषद सदस्य (MLC) नीरज कुमार ने कहा कि शराबबंदी पर सवाल उठाने से पहले, RJD नेतृत्व को अपने ही परिवार के सदस्यों और पार्टी नेताओं से सलाह-मशविरा करना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि क्या वे सचमुच शराबबंदी हटाने के पक्ष में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि RJD को चुनावों के दौरान शराब कंपनियों से मिले चंदे के बारे में भी स्पष्टीकरण देना चाहिए। JD(U) का कहना है कि शराबबंदी का फैसला जनहित में लिया गया है और इसके बारे में एक भ्रामक संदेश देने की कोशिश की जा रही है, जबकि RJD लगातार इस कानून की प्रभावशीलता पर सवाल उठा रही है।