- "चाहे हिंदू हो या मुसलमान, पेट्रोल और डीज़ल की कीमत सबके लिए एक ही है"—नितिन गडकरी ने ऐसा क्यों कहा?

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि मुसलमानों को गैस, पेट्रोल और डीज़ल उसी कीमत पर मिलते हैं, जिस कीमत पर हिंदुओं को मिलते हैं।


महाराष्ट्र के नागपुर में मज़दूर दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि बुनियादी ज़रूरतों—जैसे कि ईंधन—से हर किसी को बराबर फ़ायदा मिलता है, चाहे उनका कोई भी धर्म हो।


नितिन गडकरी ने कहा, "मुसलमानों को गैस, पेट्रोल और डीज़ल उसी कीमत पर मिलते हैं, जिस कीमत पर हिंदुओं को मिलते हैं।" उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब हाल ही में कई राज्यों में हुए चुनावों में राजनीतिक चर्चाओं में धार्मिक और जाति-आधारित मुद्दों पर ज़ोरदार प्रचार देखने को मिला है।

गडकरी ने साफ़ किया कि वह इस तरह के बँटवारों से खुद को दूर रखते हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "बाहर लोग भले ही जाति के आधार पर लड़ते हों, लेकिन मैं ऐसा नहीं करता।" उन्होंने तर्क दिया कि समाज को ऐसे मुद्दों से कोई ठोस फ़ायदा नहीं होता।

"जो कोई भी जाति की बात करेगा..."
उन्होंने आगे कहा कि जो नेता जाति-आधारित नारे लगाते हैं, वे अक्सर बंद दरवाज़ों के पीछे बिल्कुल अलग तरह से पेश आते हैं। उन्होंने कहा, "कई नेता जाति के आधार पर नारे लगाते हैं। फिर भी, वे मेरे घर आते हैं और मेरे कान में फुसफुसाकर अपने बेटों या पत्नियों के लिए चुनाव का टिकट माँगते हैं।" उन्होंने ऐसे नेताओं को "ढोंगी" बताया।

अपने भाषण के दौरान गडकरी ने ऐलान किया, "जो कोई भी जाति की बात करेगा—मैं उसे ज़ोरदार लात मारूँगा।" ये टिप्पणियाँ कई राज्यों में हाल ही में हुए चुनावों की पृष्ठभूमि में की गई थीं, जहाँ चुनावी भाषणों और रणनीतियों में हिंदू-मुस्लिम मुद्दे और जातिगत समीकरण हावी रहे थे।



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