- मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नॉमिनेशन रद्द; बीजेपी के महेश केवट निर्विरोध चुने गए; कांग्रेस के लिए बड़ा झटका।

मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नॉमिनेशन रद्द; बीजेपी के महेश केवट निर्विरोध चुने गए; कांग्रेस के लिए बड़ा झटका।

राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया है। बीजेपी ने उनके नामांकन पर आपत्ति जताई थी और आरोप लगाया था कि उन्होंने अपना आपराधिक रिकॉर्ड छिपाया है। नामांकन रद्द होने के बाद, बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट निर्विरोध राज्यसभा के लिए चुने गए हैं।


मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की एकमात्र उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन एक बड़े कानूनी विवाद में फंसने के बाद रद्द कर दिया गया। खबरों के मुताबिक, नटराजन ने अपने नामांकन पत्रों में हैदराबाद की अदालत में चल रहे एक आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई थी। अदालती दस्तावेजों से सामने आई घटनाओं की टाइमलाइन ने कांग्रेस खेमे में हलचल मचा दी है, और नटराजन का नामांकन रद्द होना पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के साथ ही, बीजेपी के महेश केवट निर्विरोध चुने गए हैं।


मामले का घटनाक्रम: घटनाओं की टाइमलाइन
11 मई, 2025 (कथित अपराध की तारीख): ए. श्रीलता की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया था।

20 अगस्त, 2025 (शिकायत दर्ज): ए. श्रीलता ने हैदराबाद में 'चौथे अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट' की अदालत में मीनाक्षी नटराजन (आरोपी नंबर 4) और अन्य के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में नटराजन पर BNS अधिनियम की धाराओं 356, 61, 45, 46, 351(2), 3(5) और 79 के तहत आरोप लगाए गए।

17 सितंबर, 2025 (न्यायिक समन जारी): मामले की गंभीरता को देखते हुए, अदालत ने मीनाक्षी नटराजन को 'प्रतिवादी को नोटिस' जारी किया। समन में उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने और अपना जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया गया। 24 अक्टूबर, 2025 (नटराजन का जवाब): मीनाक्षी नटराजन के वकील ने अदालत में जवाबी हलफनामा दाखिल किया। इस जवाब में, उन्होंने खुद को निर्दोष बताया, पूरी शिकायत को "राजनीतिक प्रतिशोध" से प्रेरित बताया और इसे खारिज करने की मांग की। 17 नवंबर, 2025 (सुनवाई की तारीख): कोर्ट ने केस खारिज नहीं किया; बल्कि सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की, जो अभी भी चल रही है।

क्या नॉमिनेशन पहले से ही खतरे में था?
कांग्रेस पार्टी मध्य प्रदेश की इस एकमात्र सीट को किसी भी कीमत पर जीतना चाहती थी; लेकिन चुनाव कानूनों के मुताबिक, उम्मीदवार को अपने नॉमिनेशन हलफनामे में अपने खिलाफ चल रहे हर आपराधिक मामले की जानकारी देनी होती है। चूंकि यह मामला 2025 से चल रहा है और नटराजन जवाब दाखिल करने के लिए 'आरोपी' के तौर पर कोर्ट में पेश भी हो चुकी हैं, इसलिए इस जानकारी को न देना 'अनजाने में हुई गलती' नहीं माना जा सकता। रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी को यह जानकारी छिपाने का दोषी पाया, जिसके चलते तकनीकी आधार पर उनका नॉमिनेशन रद्द कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद, कांग्रेस पार्टी के पास मध्य प्रदेश में राज्यसभा की दौड़ से बाहर होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। नॉमिनेशन रद्द होने के बाद, नटराजन ने कहा कि लोकतंत्र को कमजोर किया गया है और उन्होंने इस फैसले के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने का संकल्प लिया।


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