याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि लगभग 80 सालों में पहली बार इसे लोगों पर थोपा जा रहा है, और इसे न गाने पर सज़ा का प्रावधान भी रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से दो हफ़्ते के अंदर जवाब मांगा है।
*वंदे मातरम* से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि कोई नोटिस जारी न किया जाए, क्योंकि ऐसा करने से सिर्फ़ सनसनी फैलेगी। जस्टिस बागची ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि यह हमारा राष्ट्रीय गीत है। सॉलिसिटर जनरल ने सवाल उठाया कि सरकार के अलावा और कौन तय कर सकता है कि दो पद गाए जाएं या छह; कोई और यह तय नहीं कर सकता।
**याचिकाकर्ता ने कहा कि लोगों की राय ली जानी चाहिए थी**
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि लोगों की राय ली जानी चाहिए थी। जस्टिस बागची ने इस बात को सही माना। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दो हफ़्ते के अंदर जवाब देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि *वंदे मातरम* न गाने पर कानूनी या आपराधिक सज़ा के प्रावधान की जांच ज़रूरी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से दो हफ़्ते में जवाब मांगा है। यह मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें उस संशोधन को चुनौती दी गई है जिसका मकसद *वंदे मातरम* को राष्ट्रगान के बराबर कानूनी सुरक्षा देना है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए डॉ. एस. मुरलीधर ने कहा कि लगभग 80 सालों में पहली बार इसे लोगों पर थोपा जा रहा है, और इसे न मानने पर सज़ा का प्रावधान किया जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि इसे लागू करने से पहले देश के लोगों के बीच आम सहमति बननी चाहिए। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि सज़ा वाले प्रावधान की जांच होनी चाहिए। वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि धर्मनिरपेक्षता की सोच इतनी संकीर्ण नहीं हो सकती। कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिका की एक कॉपी केंद्र को दी जाए और दो हफ़्ते के अंदर जवाब मांगा।
**म्यूज़िशियन टीएम कृष्णा ने याचिका दायर की है**
कर्नाटक संगीतकार टीएम कृष्णा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर केंद्र के उस सर्कुलर को चुनौती दी है जिसमें *वंदे मातरम* के सभी छह पद गाना अनिवार्य किया गया है। कृष्णा ने उस हालिया संशोधन को भी चुनौती दी है जिसमें *वंदे मातरम* को राष्ट्रगान के बराबर दर्जा देने का प्रस्ताव है। याचिका में कहा गया है कि *वंदे मातरम* के चार छंदों में हिंदू देवी-देवताओं के प्रति भक्ति का स्पष्ट उल्लेख है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इन हिस्सों को गाना अनिवार्य करना देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप का उल्लंघन है।