चिकित्सकों का कहना है कि इस मौसम में अगर बच्चों का ध्यान न रखा जाए तो निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। निमोनिया सांस से जुड़ी बीमारी है। इससे फेफड़े में संक्रमण हो जाता है और सूजन आ जाती है और कई बार पानी भी भर जाता है। यह बुखार या जुकाम होने के बाद होता है। पांच साल से छोटे बच्चों को इससे खतरा अधिक होता है।
मौसम बदलने, सर्दी लगने, फेफड़ों में चोट लगने के अलावा खसरा और चिकन पाक्स जैसी बीमारियों से इसकी आशंका बढ़ जाती है। उम्र के हिसाब से बच्चों को भर्ती किया जा रहा है। 28 दिन से कम उम्र के बच्चों को एसएनसीयू व इससे ज्यादा उम्र के बच्चों को पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। सामान्य बीमार बच्चों को दवा के साथ स्वजन को सलाह देकर घर भेज दिया जा रहा है। रोजाना औसतन आठ से दस गंभीर बच्चों को पीडियाट्रिक व एसएनसीयू में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। निजी क्लीनिक पर भी इसी तरह निमोनिया से पीडि़त बच्चे पहुंच रहे हैं।