- श्रीप्रकाश के नक्शेकदम पर चलने की वजह से मारा गया विनोद

श्रीप्रकाश के नक्शेकदम पर चलने की वजह से मारा गया विनोद


-राजनी‎तिक ओट के बावजूद एसटीएफ ने मुठभेड़ में मा‎फिया को मार गिराया 


गोरखपुर । राजनी‎तिक ओट के बावजूद पुलिस मुठभेड़ में मा‎फिया डॉन ‎विनोद उपाध्याय मारा गया। हालां‎कि उसने खुद को बचाने के लिए राजनीति में भी शरण ली लेकिन चुनाव हारने के बाद अपराध की दुनिया का ही होकर रह गया। जानकारी के अनुसार पुलिस मुठभेड़ में मारे गये विनोद उपाध्याय ने जिस माफिया डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला की राह पर चलना शुरू किया था, आखिरकार वही अंजाम भी पाया। एसटीएफ ने उसे भी श्रीप्रकाश की तरह ही मुठभेड़ में मार गिराया।

Sanjiv Jiva Murder: ब्रह्मदत्त द्विवेदी के हत्यारे 'जीवा' को सरेआम मारने  वाला था श्रीप्रकाश शुक्ला, कहानी 25 साल पुरानी 'सौगंध' की | Brahmdutt  Dwivedi murder Sanjiv ...

 

 उसने अपने बचाव के लिए राजनीतिक ओट लेने की कोशिश भी की। चुनाव भी लड़ा। लेकिन हार गया तो पूरी तरह से अपराध की दुनिया का ही होकर रह गया। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, गोरखनाथ थाने के हिस्ट्रीशीटर विनोद उपाध्याय ने वर्ष 1999 में धमकी और मारपीट के मामले से अपराध की दुनिया में कदम रखा था। वर्ष 1999 से लेकर 2023 के बीच के 25 साल में उस पर 45 केस दर्ज हुए। इसके साथ ही उस पर चार बार गैंगस्टर की कार्रवाई भी हुई। इसके बाद वर्ष 2001 में राजू निवासी जटेपुर, दक्षिणी धर्मशाला, थाना गोरखनाथ की हत्या में वह आरोपी बना।

 

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सूत्रों की मानें तो 2004 में गोरखपुर जेल में बंद रहने के दौरान नेपाल के अपराधी जीत नारायण मिश्र ने विनोद को एक थप्पड़ मार दिया। जेल से छूटने पर सात अगस्त 2005 को संतकबीर नगर में विनोद ने जीत नारायण की हत्या कर थप्पड़ का बदला लिया। इस घटनाक्रम में जीत नारायण का बहनोई गोरेलाल भी मारा गया। इसके अलावा गोरखपुर में हिंदू युवा वाहिनी के नेता सुशील सिंह को अगवा कर पीटने का भी आरोप विनोद पर लगा। रेलवे, एफसीआई के ठेके हासिल करने के लिए सरेआम गुंडई भी उसने की थी। इसके बाद 2007 में लखनऊ के हजरतगंज में मो.अफजल उर्फ फैजी निवासी नरसिंहपुर की हत्या में भी उसका नाम सामने आया था। इसी वर्ष वह बसपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव भी गोरखपुर से लड़ा, लेकिन हार गया तोवह फिर अपराध में सक्रिय हो गया।

 

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पु‎लिस मुठभेड़ में मारा गया विनोद यूं तो मूल निवासी अयोध्या का था लेकिन परिवार बहुत पहले ही गोरखपुर शिफ्ट हो गया था। महाराज गंज थाने के उपाध्याय का पुरवा स्थित उसका पैतृक घर अब खंडहर में तब्दील हो गया है। शुक्रवार को एसटीएफ की मुठभेड़ में मारा गया विनोद परिवार समेत गोरखपुर जिले के रेल विहार कालोनी में रहता था। करीब 35 साल पहले ही विनोद का परिवार गोरखपुर शिफ्ट हो गया था। तब उसकी उम्र करीब 16 वर्ष थी। वहां पर वह पढ़ाई में सफल नहीं हो सका। इस बीच उसने अपराध की दुनिया में कदम बढ़ा दिया है।
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