X पर एक लंबी पोस्ट में, महेश जेठमलानी ने कहा कि प्रियांक खड़गे का पत्र संवैधानिक जिज्ञासा नहीं, बल्कि एक 'सोची-समझी राजनीतिक उकसावे की कार्रवाई' थी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खड़गे द्वारा उठाए गए सवालों पर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। RSS की कानूनी स्थिति और पारदर्शिता के बारे में खड़गे के पत्र के बाद, वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी प्रतिक्रिया दी। इसके जवाब में प्रियांक खड़गे ने पलटवार करते हुए जेठमलानी को सलाह दी कि उन्हें 'लेक्चर' देने की कोशिश करने से पहले असल सवालों का जवाब देना चाहिए।
**RSS पर सवाल उठाने वाले पत्र पर जेठमलानी का हमला**
X पर एक लंबी पोस्ट शेयर करते हुए महेश जेठमलानी ने कहा कि प्रियांक खड़गे का पत्र संवैधानिक जांच का मामला नहीं, बल्कि एक 'सोची-समझी राजनीतिक उकसावे की कार्रवाई' थी। उन्होंने कहा कि RSS पिछले 100 वर्षों से राष्ट्र-निर्माण की गतिविधियों में खुले तौर पर शामिल रहा है और संविधान का अनुच्छेद 19(1)(c) नागरिकों को संगठन बनाने की स्वतंत्रता देता है। उनके अनुसार, केवल राजनीतिक सनक के आधार पर किसी स्वैच्छिक संगठन के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं किया जा सकता।
**कानून किसी मंत्री की सनक पर नहीं चलता**
अपनी पोस्ट में महेश जेठमलानी ने लिखा कि केवल मंत्री का पद संभालने से किसी को यह अधिकार नहीं मिल जाता कि वह किसी संगठन को अपनी इच्छा के अनुसार काम करने का आदेश दे। उन्होंने जोर देकर कहा कि कानून सर्वोपरि है, और RSS को उन दायित्वों का पालन करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता जो कानून द्वारा अनिवार्य नहीं हैं।
**प्रियांक खड़गे का पलटवार**
यह भी पढ़ें
जेठमलानी की टिप्पणियों का जवाब देते हुए प्रियांक खड़गे ने लिखा कि RSS को लेकर 'कानूनी दिग्गजों' के बीच बहस शुरू हो गई है, और वह किसी भी मंच पर कानून, संविधान, पारदर्शिता और जवाबदेही पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने तंज कसते हुए उम्मीद जताई कि जेठमलानी की पोस्ट का खर्च BJP या RSS के खाते में नहीं डाला जाएगा। 'मुझे लेक्चर देने से पहले असली सवाल का जवाब दें'
प्रियांक खड़गे ने लिखा कि संवैधानिक नैतिकता पर लेक्चर देने से पहले उन्हें यह बताया जाना चाहिए कि इतने बड़े प्रभाव और सार्वजनिक गतिविधियों वाले संगठन को मानक कानूनी पारदर्शिता से छूट क्यों मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर महेश जेठमलानी RSS के अधिकृत कानूनी प्रतिनिधि के तौर पर उनके ऑफिस आना चाहें, तो वे उनके सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं।
निजी हमले का जवाब
महेश जेठमलानी पर निशाना साधते हुए खड़गे ने कहा, "सरनेम से भले ही दरवाजे खुल जाएं, लेकिन इससे हर तर्क में वजन नहीं आ जाता।" उन्होंने यह भी बताया कि वे जनता द्वारा तीन बार चुने गए प्रतिनिधि हैं, जबकि जेठमलानी एक नॉमिनेटेड (नामित) प्रतिनिधि हैं। इसके अलावा, उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में RSS की शाखाओं, गौशालाओं और गोमूत्र जैसे विषयों पर सवाल उठाए, जिन पर बाद में सोशल मीडिया पर चर्चा छिड़ गई।
सोशल मीडिया पर बहस तेज
RSS की कानूनी स्थिति और पारदर्शिता को लेकर महेश जेठमलानी और प्रियांक खड़गे के बीच चल रही जुबानी जंग अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। दोनों नेताओं के समर्थक अपने-अपने पक्ष में तर्क दे रहे हैं और यह विवाद राजनीतिक बहस का एक नया मुद्दा बन गया है।