अमेरिका H-1B वीज़ा एक्सटेंशन पर नई फीस लगाने की तैयारी कर रहा है। जानिए इसका अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों पर क्या असर पड़ सकता है और यह कब लागू हो सकता है।
अगर आप अमेरिका में काम करते हैं या वहाँ जाने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए एक खबर है। अमेरिकी सरकार H-1B वीज़ा एक्सटेंशन के लिए नई फीस लाने की तैयारी कर रही है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो कंपनियों को अपने विदेशी कर्मचारियों के H-1B वीज़ा को रिन्यू कराने के लिए ज़्यादा खर्च करना पड़ सकता है।
नया प्रस्ताव क्या है?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन H-1B वीज़ा एक्सटेंशन पर अतिरिक्त फीस लगाने पर विचार कर रहा है। अभी नई H-1B याचिकाओं और अन्य इमिग्रेशन प्रक्रियाओं के लिए अलग-अलग फीस लगती है, लेकिन अब वीज़ा रिन्यूअल भी महंगा हो सकता है।
सबसे ज़्यादा असर किस पर पड़ेगा?
इस फैसले का सबसे ज़्यादा असर उन अमेरिकी कंपनियों पर पड़ने की संभावना है जो H-1B वीज़ा पर बड़ी संख्या में विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखती हैं। इनमें IT, इंजीनियरिंग, फाइनेंस और हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनियाँ शामिल हैं। कई भारतीय IT कंपनियाँ भी H-1B वीज़ा पर काफी हद तक निर्भर हैं। हर साल H-1B वीज़ा पाने वालों में भारतीयों का समूह सबसे बड़ा होता है। नतीजतन, अगर वीज़ा एक्सटेंशन महंगा होता है, तो कंपनियों का खर्च बढ़ जाएगा। हालाँकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कर्मचारियों को सीधे अतिरिक्त फीस देनी होगी; अंतिम फैसला कंपनी का होगा।
फीस क्यों बढ़ाई जा सकती है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सरकार इमिग्रेशन सिस्टम की लागत को पूरा करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए यह कदम उठा सकती है। हालाँकि, इस प्रस्ताव पर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
क्या यह नियम तुरंत लागू होगा?
फिलहाल, यह सिर्फ़ एक प्रस्ताव है और इसे कब लागू किया जाएगा, इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। किसी भी स्थिति में, इसे लागू करने से पहले ज़रूरी प्रक्रियाओं और मंज़ूरी को पूरा करना होगा। इसलिए, H-1B वीज़ा धारकों और कंपनियों को सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतज़ार करना होगा।