बिहार में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण दो जगहों—भागलपुर और बेगूसराय—पर तटबंध (embankments) टूट गए हैं। मंत्री विजय चौधरी ने बताया कि मरम्मत का काम चल रहा है। उन्होंने फरक्का समझौते को लेकर लालू यादव पर भी निशाना साधा।
गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है। पटना समेत कई इलाकों में नदी उफान पर है और उपमुख्यमंत्री व जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने दो जगहों पर तटबंध टूटने की पुष्टि की है: भागलपुर में राघोपुर और बेगूसराय में बछवाड़ा।
उन्होंने बताया कि जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी के कारण ये तटबंध टूटे। राहत और मरम्मत के काम के लिए जल संसाधन विभाग की टीमों को दोनों जगहों पर तैनात किया गया है।
**राघोपुर और बछवाड़ा में तटबंध टूटे**
विजय कुमार चौधरी ने कहा कि तटबंध टूटने से पानी निचले इलाकों तक पहुंच गया है, हालांकि अभी यह आबादी वाले इलाकों में नहीं घुसा है। बेगूसराय में टूटा तटबंध एक 'ज़मींदारी' तटबंध है। अधिकारियों और इंजीनियरों को मौके पर भेजा गया है और जल संसाधन विभाग के सचिव भी भागलपुर पहुंच गए हैं।
मंत्री ने कहा कि सरकार प्रभावित लोगों की संख्या कम से कम रखने की कोशिश कर रही है। तटबंध की मरम्मत के साथ-साथ राहत और बचाव कार्य भी शुरू कर दिए गए हैं। प्रशासन लगातार जलस्तर और संवेदनशील इलाकों पर नज़र रख रहा है।
**फरक्का समझौते पर लालू यादव पर निशाना**
विजय चौधरी ने फरक्का बैराज और भारत-बांग्लादेश जल संधि के बारे में RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव की टिप्पणियों का जवाब दिया। उन्होंने बताया कि भारत और बांग्लादेश के बीच जल संधि पर दिसंबर 1996 में हस्ताक्षर किए गए थे। उस समय लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे और H.D. देवेगौड़ा देश के प्रधानमंत्री थे।
चौधरी ने कहा कि उस समय RJD केंद्र सरकार का हिस्सा थी; इसलिए, आज उस समझौते के लिए नीतीश कुमार को ज़िम्मेदार ठहराना गलत है। उन्होंने कहा कि उस समय बिहार के हितों को नज़रअंदाज़ किया गया था और राज्य अब इसके नतीजे भुगत रहा है।
**'बिहार को अब नज़रअंदाज़ नहीं किया जाएगा'**
मंत्री ने कहा कि 1996 के समझौते की अवधि खत्म होने वाली है और इसके नवीनीकरण (renewal) पर बातचीत शुरू हो चुकी है। उन्होंने बताया कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली गया और केंद्रीय विदेश और वित्त मंत्रियों के सामने राज्य का पक्ष रखा।
विजय चौधरी ने कहा कि फरक्का समझौते और गंगा में गाद (silt) जमा होने की समस्या से बिहार सबसे ज़्यादा प्रभावित राज्य है। इसलिए, भविष्य में किसी भी समझौते को रिन्यू करते समय राज्य के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
**गाद से नदियों के अस्तित्व को खतरा**
जल संसाधन मंत्री ने गंगा सहित बिहार की नदियों में गाद जमा होने की बढ़ती समस्या पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि गाद जमा होने से नदियों की पानी रोकने की क्षमता कम हो रही है और उनका स्वरूप भी बदल रहा है।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि गाद के प्रबंधन के लिए बिहार को केंद्र सरकार की मदद की ज़रूरत है। नदियों में गाद जमा होने की समस्या का स्थायी समाधान करने वाली योजनाओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। विजय चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार लंबे समय से बिहार से जुड़े इन मुद्दों को उठाते रहे हैं और अब राज्य का पक्ष केंद्र सरकार के सामने स्पष्ट रूप से रखा गया है।