- ईरान के ख़िलाफ़ जॉर्डन का सख़्त रुख़, ऐलान: 'हम अपनी सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं करेंगे'

जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमान सफादी ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि संघर्ष शुरू होने के दो घंटे बाद जॉर्डन पर हमला किया गया और ज़ोर देकर कहा कि देश अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।

जॉर्डन ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष पर अपना रुख स्पष्ट किया है। विदेश मंत्री अयमान सफादी ने कहा कि उनका देश इस युद्ध का हिस्सा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि संघर्ष शुरू होने के कुछ ही समय बाद, ईरान ने जॉर्डन और पश्चिम एशिया के अन्य देशों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।

वियना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, सफादी ने बताया कि लड़ाई शुरू होने के लगभग दो घंटे बाद जॉर्डन पर हमला किया गया। उनके अनुसार, जॉर्डन ने युद्ध में शामिल होकर किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं किया; इसके बजाय, उसने अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दी।

**क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने के लिए ईरान पर आरोप**

अयमान सफादी ने कहा कि जॉर्डन और क्षेत्र के अन्य देशों को अस्थिर करने की कोशिशें केवल मौजूदा संघर्ष तक ही सीमित नहीं हैं। उन्होंने ईरान पर विभिन्न नेटवर्क के माध्यम से क्षेत्र में अस्थिरता को बढ़ावा देने, साथ ही हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी करने के लंबे समय से चल रहे प्रयासों का आरोप लगाया। उन्होंने ईरान के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि जॉर्डन किसी अन्य देश के सैन्य अभियानों में सहयोग कर रहा था। सफादी ने ज़ोर देकर कहा कि जॉर्डन एक संप्रभु राष्ट्र है और उसे अपनी सुरक्षा के संबंध में अपने निर्णय लेने का अधिकार है।

**जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी पर स्पष्टीकरण**

जॉर्डन के विदेश मंत्री ने उन दावों का भी खंडन किया कि जॉर्डन का इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए एक बेस के तौर पर किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि जॉर्डन में कोई अलग या स्वतंत्र अमेरिकी सैन्य बेस नहीं है। सफादी के अनुसार, जॉर्डन और अमेरिका के बीच लंबे समय से रक्षा सहयोग की व्यवस्था है, जिसके तहत अमेरिकी सैनिक जॉर्डन के कुछ सैन्य ठिकानों पर मौजूद रहते हैं। उन्होंने बताया कि विभिन्न सहयोग समझौतों के तहत जर्मनी, फ्रांस और ऑस्ट्रिया के सैनिक भी जॉर्डन में मौजूद हैं।

**अमेरिका-जॉर्डन रक्षा समझौते का आधार क्या है?**

अमेरिका और जॉर्डन ने 2021 में एक रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत, अमेरिकी सेना और उसके ठेकेदारों को जॉर्डन में 12 सैन्य सुविधाओं तक पहुंच प्रदान की गई है। जॉर्डन का कहना है कि ऐसा सहयोग उसकी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है। इसके अलावा, नाटो ने 2025 में जॉर्डन में अपना पहला क्षेत्रीय संपर्क कार्यालय स्थापित किया, जिससे दोनों के बीच सुरक्षा सहयोग और बढ़ा है। बातचीत के लिए तैयार, लेकिन सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं: जॉर्डन

सफादी ने कहा कि जॉर्डन सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीति के ज़रिए विवादों को सुलझाना चाहता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उनका देश शांतिपूर्ण और कूटनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास जारी रखेगा।

 

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