जवाबदेही की मांग करते हुए, प्रदर्शनकारी सरकारी दफ्तरों और शिक्षा विभाग के मुख्यालय के बाहर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं और लगातार एक ही मांग उठा रहे हैं: "शिक्षा मंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।"
ओडिशा में एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है, जिससे हजारों छात्र, छात्र संघ के नेता और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) जैसे एक्टिविस्ट ग्रुप सड़कों पर उतर आए हैं। इस गुस्से की मुख्य वजह राज्य बोर्ड द्वारा जारी नई स्कूली पाठ्यपुस्तकों में गंभीर तथ्यात्मक गलतियां, ऐतिहासिक अशुद्धियां और विवादास्पद बदलाव हैं।
शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों के बीच शुरू में पनपी नाराजगी तेजी से पूरे राज्य में एक बड़े आंदोलन में बदल गई है। जवाबदेही की मांग करते हुए, प्रदर्शनकारी सरकारी दफ्तरों और शिक्षा विभाग के मुख्यालय के बाहर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं और लगातार एक ही मांग उठा रहे हैं: "शिक्षा मंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।"
यह विवाद ओडिशा के स्कूल और जन शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में मिडिल और हाई स्कूल के छात्रों को बांटी गई पाठ्यपुस्तकों को लेकर है। नए शैक्षणिक सत्र के लिए किताबें मिलने पर, शिक्षकों और छात्र समूहों ने इतिहास, राजनीति विज्ञान और पर्यावरण अध्ययन जैसे विषयों में गंभीर गलतियां पाईं।
गलत ऐतिहासिक तथ्य और जानकारी की कमी: सिविल सोसाइटी समूहों और CJP की मुख्य शिकायतों में से एक ऐतिहासिक तथ्यों को गलत तरीके से पेश करना है। क्षेत्र की प्रमुख ऐतिहासिक हस्तियों, ओडिशा के स्वतंत्रता सेनानियों और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अहम घटनाओं को या तो गलत तारीखों के साथ पेश किया गया या पूरी तरह से छोड़ दिया गया। कुछ मामलों में, सामाजिक सुधार आंदोलनों को गलत तरीके से दिखाया गया, जिससे वैचारिक पक्षपात के आरोप लगे।
संवैधानिक मूल्यों के बारे में गुमराह करने वाली जानकारी: शिक्षा एक्टिविस्टों ने बताया कि भारतीय संविधान, धर्मनिरपेक्षता और मौलिक अधिकारों को समझाने वाले अध्यायों में ऐसी परिभाषाएं थीं जो लोकतांत्रिक मूल्यों के महत्व को कम करती थीं। CJP ने जोर देकर कहा कि ये बदलाव युवा पीढ़ी को उनके संवैधानिक अधिकारों और देश के लोकतांत्रिक ढांचे के बारे में गलत जानकारी दे रहे हैं। भौगोलिक और तथ्यात्मक गलतियां: इतिहास और सामाजिक विज्ञान के अलावा, विज्ञान और भूगोल की पाठ्यपुस्तकों में भी बुनियादी तथ्यात्मक गलतियां पाई गईं। गलत नक्शे, जनसंख्या के गलत आंकड़े और लगभग हर पन्ने पर टाइपिंग की गलतियों ने राज्य के पाठ्यक्रम ब्यूरो की प्रूफरीडिंग और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
CJP और छात्र संगठनों की भूमिका
'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने राज्य भर के विभिन्न छात्र संघों और युवा समूहों के साथ मिलकर इन पाठ्यपुस्तकों के वितरण का विरोध करने में अहम भूमिका निभाई है। उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- पाठ्यपुस्तकों को पूरी तरह वापस लेना: सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में बांटी गई सभी त्रुटिपूर्ण पाठ्यपुस्तकों को तुरंत वापस लिया जाए।
- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: स्कूल और जन शिक्षा मंत्री से प्रिंटिंग और पाठ्यक्रम को मंज़ूरी देने की प्रक्रियाओं में हुई खामियों के लिए सीधी राजनीतिक जवाबदेही की मांग।
- उच्च-स्तरीय जांच: पाठ्यपुस्तक समिति और सामग्री की प्रिंटिंग और प्रूफरीडिंग के लिए ज़िम्मेदार निजी प्रकाशकों की स्वतंत्र जांच।
- विशेषज्ञ समिति का गठन: दोबारा प्रकाशन से पहले अध्यायों की समीक्षा और उन्हें फिर से लिखने के लिए इतिहासकारों, अनुभवी शिक्षकों और कानूनी विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र समिति का गठन।
CJP के एक प्रतिनिधि ने कहा, "शिक्षा लोकतांत्रिक समाज की नींव है। युवा छात्रों को गलत तथ्य और जानकारी देना, जो संवैधानिक मूल्यों से समझौता करते हैं, एक गंभीर अन्याय है। यह केवल प्रिंटिंग की गलती नहीं है, बल्कि एक प्रशासनिक विफलता है जो लाखों बच्चों के भविष्य पर असर डालती है।"
सड़क पर विरोध प्रदर्शन और जनता की प्रतिक्रिया
पिछले कुछ हफ़्तों में इस आंदोलन ने काफी ज़ोर पकड़ा है। भुवनेश्वर, कटक, संबलपुर और बेरहामपुर जैसे बड़े शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन, रैलियां और धरने आयोजित किए गए हैं। छात्रों ने इस मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए शांतिपूर्ण मानव श्रृंखलाएं बनाईं और आंशिक रूप से कक्षाओं का बहिष्कार किया। प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा के बाहर शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका और प्रशासनिक कार्यालयों की ओर मार्च किया, जिसके कारण पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। अभिभावक संघों ने चिंता व्यक्त की है कि बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को गलत सामग्री पढ़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे उनके भविष्य और प्रतियोगी परीक्षाओं में उनके प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ सकता है।
**सरकार का रुख और प्रशासनिक कार्रवाई**
जनता के बढ़ते दबाव ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को बैकफुट पर ला दिया है। शुरू में, अधिकारियों ने इन गलतियों को मामूली "टाइपिंग की गलतियां" बताकर खारिज कर दिया था और कहा था कि उन्हें 'सुधार सूची' (errata sheet) के माध्यम से ठीक कर दिया जाएगा। हालांकि, विरोध प्रदर्शन तेज होने और कानूनी नोटिस मिलने के बाद, सरकार ने वितरण पर अस्थायी रोक लगाने की घोषणा की।
विवादित मॉड्यूल के बारे में।
राज्य शिक्षा बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पाठ्यपुस्तकों की जांच के लिए एक आंतरिक समीक्षा समिति के गठन की पुष्टि की है। फिर भी, छात्र संघों और CJP का कहना है कि सतही समीक्षा काफी नहीं है; वे तब तक अपना आंदोलन वापस लेने से इनकार कर रहे हैं जब तक कि शिक्षा मंत्री जिम्मेदारी स्वीकार करके अपने पद से इस्तीफा न दे दें।
ओडिशा में चल रहा संकट पाठ्यक्रम की विश्वसनीयता, पाठ्यपुस्तक प्रकाशन में पारदर्शिता और सार्वजनिक शिक्षा में राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर देश भर में बढ़ती चिंताओं को उजागर करता है।