आम आदमी पहले से ही महंगाई से जूझ रहा है। रोज़मर्रा की ज़रूरी चीज़ों जैसे प्याज़, चीनी और दूध की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। अब ऐसी अटकलें हैं कि चावल की कीमतें भी बढ़ने वाली हैं।
आम आदमी दिवाली से पहले एक और महंगाई की मार झेलने को तैयार है। प्याज़, चीनी, नींबू और LPG के बाद अब चावल की बारी है। हाँ, चावल की कीमतें बढ़ने वाली हैं और ये ₹100 प्रति किलोग्राम तक पहुँच सकती हैं। यह स्थिति तमिलनाडु में बन रही है, जहाँ पिछले कुछ हफ़्तों में ही चावल की कीमतों में ₹20 से ₹40 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है।
व्यापारियों का अनुमान है कि दिवाली से पहले कुछ खास किस्म के चावल की कीमत ₹100 तक पहुँच सकती है। तो, कीमतों में इस अचानक बढ़ोतरी की वजह क्या है? आइए जानते हैं।
**कीमतें ₹100 तक पहुँचने की उम्मीद**
तमिलनाडु में पिछले कुछ हफ़्तों से चावल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। रिपोर्टों से पता चलता है कि कुछ किस्मों की कीमत में ₹20 से ₹40 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, व्यापारियों ने चावल की किस्म के आधार पर 25-30 किलोग्राम वाले बैग की कीमत में भी ₹300 से ₹600 तक की बढ़ोतरी की है। राइस मिल मालिकों और धान व्यापारियों का कहना है कि दिवाली से पहले कुछ किस्म के चावल की कीमत ₹100 प्रति किलोग्राम तक पहुँच सकती है। **अभी क्या दाम हैं?** चावल की किस्म पिछली कीमत मौजूदा/संभावित कीमत
बासमती चावल ₹85 ₹100 प्रति किलो
प्रीमियम चावल (जैसे, पोन्नी, सोना मसूरी) ₹48–65 ₹85–100 तक पहुँचने की संभावना
आम चावल ₹40 कीमत ₹45–55 के बीच
25 किलो के बैग की मौजूदा कीमतें
डीलक्स पोन्नी – ₹1,400–1,800
पोन्नी – ₹1,600–1,950
व्हाइट पोन्नी – ₹1,900–2,300
इडली चावल – ₹900–1,200
कच्चा चावल – ₹1,500–1,800
शिवाजी पोन्नी – ₹1,800–2,400
कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
कीमतों में इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण धान की कम सप्लाई है। तमिलनाडु में स्थानीय खपत के लिए ज़रूरी अच्छी क्वालिटी का धान काफ़ी मात्रा में पैदा नहीं होता; इसे पोन्नी जैसी किस्मों के लिए आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक से धान मंगाना पड़ता है।
व्यापारियों का कहना है कि जहाँ तमिलनाडु और दूसरे राज्यों में धान का उत्पादन और आवक कम हुई है, वहीं दिवाली और दूसरे त्योहारों के कारण बाज़ार में प्रीमियम और अच्छी क्वालिटी के चावल की मांग लगातार बनी हुई है। इसके अलावा, इथेनॉल बनाने में चावल का ज़्यादा इस्तेमाल और अफ़्रीकी देशों से टूटे चावल की ज़बरदस्त एक्सपोर्ट मांग ने घरेलू कीमतों को और बढ़ा दिया है। इन वजहों से राइस मिलों में स्टॉक कम हो गया है और उपलब्ध धान की लागत बढ़ गई है। ज़ाहिर है, जब धान महंगा होता है, तो चावल की कीमतें भी बढ़ जाती हैं।