गुजरात निकाय चुनावों पर अमित शाह की टिप्पणियों के बाद कांग्रेस ने पलटवार किया है। जयराम रमेश से लेकर पवन खेड़ा और इमरान मसूद तक के नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है, और जयराम रमेश ने तो मौजूदा सरकार को तानाशाही तक करार दिया है।
गुजरात निकाय चुनावों में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन के बाद अमित शाह के बयान पर राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने उन पर तीखा हमला बोला है। शाह का जवाब देते हुए पार्टी ने कहा कि "वोट-चोरी" की साजिश के मुख्य सूत्रधारों में से एक ने—जैसा कि उम्मीद थी—2029 के लोकसभा चुनावों के बारे में भविष्यवाणी की है।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अपने "3 Bs"—बड़बोलेपन, झांसे और धौंस (Bombast, Bluff, and Bluster)—के साथ वापस आ गए हैं। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने शायद इन "3 Bs" को हासिल करने के लिए धांधली की प्रक्रिया शुरू भी कर दी है, लेकिन जोर देकर कहा कि ऐसा नहीं होगा।
**जयराम: झूठ पर टिकी तानाशाही सरकार**
कांग्रेस नेता रमेश ने कहा, "लोग जानते हैं कि वोट देने का उनका संवैधानिक अधिकार ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है, जो उन्हें झूठ पर टिकी तानाशाही सरकारों को जवाबदेह ठहराने और उन्हें सत्ता से बाहर करने में सक्षम बनाता है। इसीलिए भारत—और खासकर युवा—सड़कों पर उतर आए हैं।"
उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों में बढ़ते असंतोष से यह "खतरनाक जोड़ी" साफ तौर पर घबरा गई है। उन्होंने सुझाव दिया कि गृह मंत्री को अपने विभिन्न गलत कामों की जांच का सामना करने की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए—ऐसी जांच जो उनके "साहब" की सरकार गिरने के बाद शुरू होगी।
**एक अजीब टिप्पणी: पवन खेड़ा**
इस बीच, राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि बीजेपी को सत्ता में आने और बहुमत हासिल करने में 50-60 साल लग गए। उन्होंने शाह के बयान को अजीब बताया और इस विडंबना की ओर इशारा किया कि वे कांग्रेस की आलोचना कर रहे हैं क्योंकि वह लंबे समय से कई राज्यों में सत्ता से बाहर है, जबकि खुद बीजेपी दशकों तक राष्ट्रीय मंच से गायब रही थी। आप क्या साबित करने की कोशिश कर रहे हैं? खेड़ा ने कहा, "फिर आप दावा करते हैं कि आप 2029 में भी जीतेंगे। ज्ञानेश कुमार पर इतना भरोसा क्यों है, और क्या ज्ञानेश 2029 तक पद पर बने रहेंगे? जहाँ तक इस चुनाव आयोग और इसके मौजूदा कामकाज का सवाल है, हम इसे 2029 तक चलने देंगे। क्योंकि उन्हें इतना भरोसा है—वे दावा कर रहे हैं कि वे 2029 में जीतेंगे—तो वे असल में हमारी बात ही साबित कर रहे हैं। आप आखिर कैसे जीत रहे हैं? कम से कम सड़कों पर उतरें और जनता का गुस्सा देखें। पुलिस की मौजूदगी हटाएँ और खुद आकर वह गुस्सा देखें।"
उन्होंने आगे कहा, "वोटर लिस्ट से 13 करोड़ लोगों के नाम क्यों हटाए गए? जिन लोगों को आपने मृत घोषित कर दिया, वे सड़कों पर घूमते दिख रहे हैं; वे ज्ञापन सौंप रहे हैं। और फिर आप पूछते हैं, 'ज्ञानेश का ज़िक्र क्यों?' तो फिर हम किसका नाम लें? हम कठपुतली का नाम लेंगे, लेकिन हम उन लोगों का भी नाम लेंगे जो कठपुतलियों को नियंत्रित करते हैं। हम पीएम मोदी, अमित शाह और मोहन भागवत का नाम लेते हैं—हम उन सभी का नाम लेते हैं।"
आपने पूरे सिस्टम को भ्रष्ट कर दिया है: इमरान मसूद
इस बीच, कांग्रेस के लोकसभा सांसद इमरान मसूद ने कहा कि उनकी लड़ाई इस बात के खिलाफ है कि पूरा सिस्टम भ्रष्ट हो चुका है। चुनाव आयोग को महज एक कठपुतली बना दिया गया है। हम यह लड़ाई आखिर तक लड़ेंगे; हम ऐसा नहीं होने देंगे। उन्हें 'घुसपैठियों' का मुद्दा बार-बार उठाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश बंद करनी चाहिए। सिर्फ इसलिए कि वोटर लिस्ट से 13 करोड़ लोगों के नाम हटा दिए गए, इसका मतलब यह नहीं है कि 13 करोड़ घुसपैठिए हैं। लिस्ट सार्वजनिक करें। दिखाएँ कि कितने लोगों की पहचान की गई और कितनों को वास्तव में देश से निकाला गया। कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया अमित शाह के उस बयान के जवाब में आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि "गुजरात तो बस एक झलक है; 2029 अभी आना बाकी है।" शाह ने कहा था कि गुजरात की जनता ने कांग्रेस पर अपना फैसला सुना दिया है। भारत की जनता 2029 के आगामी चुनावों में राहुल गांधी के बेबुनियाद आरोपों का मुंहतोड़ जवाब देगी।