शिवसेना (UBT) नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने दावा किया है कि सत्ता परिवर्तन होना तय है। उन्होंने संकेत दिया कि राहुल गांधी के वियतनाम से लौटने के बाद देश में बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद वियतनाम गए हैं। विरोध प्रदर्शनों के बीच उनके अचानक विदेश जाने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। इस बीच, शिवसेना (UBT) नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
राउत ने दावा किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के वियतनाम से लौटने के बाद देश में सत्ता परिवर्तन होगा। उन्होंने यह भी कहा कि 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन एकजुट है। मुंबई में मीडिया से बात करते हुए राउत ने ये बातें कहीं।
"सत्ता परिवर्तन होगा; बस इंतजार करें और देखें।"
राहुल गांधी के अचानक विदेश दौरे के बारे में पूछे जाने पर, राउत ने हंसते हुए कहा, "सत्ता परिवर्तन होगा; बस इंतजार करें और देखें। राहुल गांधी वियतनाम गए हैं, है ना? उनके लौटने का इंतजार करें।" विपक्ष की रणनीति और सरकार बदलने की संभावना को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच संजय राउत का यह बयान आया है। हालांकि, शिवसेना नेता ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस तरह के बदलाव की बात कर रहे हैं, या यह बदलाव कैसे आएगा।
अल्बानिया में हुई हिंसा से जुड़ी पिछली पोस्ट
इससे पहले, संजय राउत ने 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें अल्बानिया में हो रहे जोरदार विरोध प्रदर्शन दिख रहे थे। उन्होंने कहा कि कई देशों को—खासकर भारत को—ऐसी घटनाओं से सबक लेना चाहिए। उस ट्वीट ने काफी राजनीतिक बयानबाजी को जन्म दिया था। अब, उनके इस ताजा बयान से जनता के बीच एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश गया है: विपक्ष सत्ता परिवर्तन के अपने दावों को लेकर गंभीर है।
बयान पर मची हलचल
राउत का यह बयान इसलिए भी काफी अहम हो जाता है, क्योंकि हाल ही में विजयादशमी के मौके पर अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि फ्रांस या बांग्लादेश जैसे देशों में तो सत्ता परिवर्तन हो सकता है, लेकिन भारत में ऐसा 'सत्ता परिवर्तन' संभव नहीं है। इससे पहले, राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिबल ने भी सत्ता परिवर्तन को लेकर टिप्पणी की थी और कहा था कि "अब उनके जाने का समय आ गया है।" अब, राउत के इस बयान ने सोशल मीडिया पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। हालांकि, कुछ लोग इसे विपक्ष का एक राजनीतिक हथकंडा मान रहे हैं, जिसका मकसद आगामी चुनावों से पहले एक खास नैरेटिव तैयार करना है।