कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे हाई-प्रोफाइल मानहानि मामले में आज एक बड़ा फैसला आया है। सुल्तानपुर की विशेष MP-MLA कोर्ट ने राहुल गांधी को उस मामले से बरी कर दिया है, जो 2018 में अमित शाह के बारे में उनकी टिप्पणियों से जुड़ा था।
सोमवार को, आठ साल बाद, उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में एक विशेष MP-MLA कोर्ट ने मानहानि के मामले में राहुल गांधी—जो वर्तमान में लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं—को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने उन्हें निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया। यह मामला 2018 में राहुल गांधी द्वारा तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष और वर्तमान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणियों से जुड़ा था; एक स्थानीय भाजपा नेता ने इन टिप्पणियों को लेकर मुकदमा दर्ज कराया था। फैसला सुनाए जाते समय राहुल गांधी खुद कोर्ट में मौजूद थे, जिसके चलते जिला प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया था।
जैसे ही कोर्ट रूम से राहुल गांधी के बरी होने की खबर आई, पार्टी कार्यकर्ता खुशी से झूम उठे और नाच-गाकर जश्न मनाने लगे।
कोर्ट परिसर के अंदर और बाहर कड़ी सुरक्षा
शिकायतकर्ता के वकील संतोष कुमार पांडे ने बताया था कि 13 अक्टूबर को विशेष MP-MLA कोर्ट के जज शुभम वर्मा ने फैसला सुनाने के लिए 26 अक्टूबर की तारीख तय की थी। उन्होंने बताया था कि रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सोमवार को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, राहुल गांधी आज सुबह करीब 11:00 बजे सुल्तानपुर की MP-MLA कोर्ट पहुंचे। उनके आने को देखते हुए, कोर्ट परिसर के अंदर और बाहर सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी गई थी।
यह मामला क्या है?
भाजपा नेता और जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि उसी साल बेंगलुरु में एक चुनावी रैली के दौरान, राहुल गांधी ने अमित शाह के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान, 8 मई 2018 को बेंगलुरु में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, राहुल गांधी ने 2005 के सोहराबुद्दीन शेख हत्याकांड मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा: "भारत के लोग भूल गए हैं कि बीजेपी अध्यक्ष एक हत्या के मामले में आरोपी रहे हैं। यही सच है। एक ऐसी पार्टी, जिसके अध्यक्ष हत्या के मामले में आरोपी रहे हों, वह ईमानदारी और शुचिता की बात करती है।" 2014 में शाह को इस मामले से बरी कर दिया गया था। 2016 में, सुप्रीम कोर्ट ने भी बीजेपी अध्यक्ष के खिलाफ लगे आरोपों की फिर से जांच की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था।
इस टिप्पणी के बाद, अदालत ने 27 नवंबर 2023 को गांधी को तलब किया ताकि उन पर मुकदमा चल सके। इसके बाद वे अदालत में पेश हुए और उन्हें जमानत मिल गई। बाद में, मिश्रा ने राहुल गांधी की आवाज़ का नमूना लेकर उसकी तुलना (विश्लेषण) कराने के लिए एक आवेदन दायर किया, जिसे निचली अदालत ने खारिज कर दिया। इस फैसले के खिलाफ दायर एक पुनरीक्षण याचिका (रिवीजन पिटीशन) को भी सत्र अदालत ने खारिज कर दिया। इसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी निचली अदालतों के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। 26 अक्टूबर को, राहुल गांधी इस मामले के सिलसिले में चौथी बार व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए।
इस बीच, बिहार के पटना में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के पिता को लेकर की गई एक विवादास्पद टिप्पणी के बाद, बीजेपी ने इसका जवाब देना शुरू कर दिया है। बीजेपी ने खड़गे के बयान को "ठगों" की भाषा करार दिया है।