कांग्रेस पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। के.सी. वेणुगोपाल ने पार्टी के उन नेताओं और उम्मीदवारों के साथ बैठक की, जो पिछले चुनाव में हार गए थे। इस बैठक में हार के कारणों पर चर्चा की गई और चुनावी रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया।
कांग्रेस ने आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए अपनी तैयारियों को और तेज कर दिया है। पार्टी के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं और विधायकों के साथ बैठक कर चुनावी रणनीति पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने उन नेताओं से भी बात की जो पिछले चुनाव में अपनी सीट नहीं जीत पाए थे। उन्होंने हार के कारणों और उनके सामने आई चुनौतियों के बारे में पूछा, ताकि इन कमियों को दूर किया जा सके।
इन बैठकों में, के.सी. वेणुगोपाल ने जोर देकर कहा कि पंजाब में कांग्रेस की सत्ता में वापसी के लिए सभी नेताओं को एकजुट होकर काम करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आपसी मतभेद और अलग-अलग चुनाव प्रचार करना पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। उन्होंने नेताओं से अपने निजी राजनीतिक एजेंडे से ऊपर उठकर संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देने को कहा।
बैठक में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। कुछ विधायकों ने सुझाव दिया कि चुनाव से पहले ही मुख्यमंत्री पद के चेहरे की घोषणा कर दी जानी चाहिए। इसके जवाब में वेणुगोपाल ने कहा कि चुनाव राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा और मुख्यमंत्री का चयन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में से ही किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी "बाहरी" व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
**सर्वे में कांग्रेस को 62-65 सीटें मिलने का अनुमान**
बैठक में पंजाब में कराए गए सर्वे की रिपोर्टों की भी समीक्षा की गई। के.सी. वेणुगोपाल के अनुसार, शुरुआती सर्वे बताते हैं कि कांग्रेस 62 से 65 सीटें जीत सकती है। पार्टी दो और सर्वे कराने की योजना बना रही है। उन्होंने नेताओं को चेतावनी दी कि अगर चुनाव में प्रदर्शन खराब रहता है, तो इसके लिए जवाबदेही तय की जाएगी।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी सहित कई वरिष्ठ नेताओं के साथ संगठन को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। वेणुगोपाल ने सभी नेताओं को अनुशासन बनाए रखने और पार्टी के लिए एकजुट होकर काम करने की सलाह दी। राहुल गांधी की रैली से चुनाव प्रचार को मिलेगी गति
बैठक में राहुल गांधी के आगामी कार्यक्रमों पर भी चर्चा हुई। 1 नवंबर को दिल्ली और 4 नवंबर को संगरूर में होने वाली रैलियों के लिए एक रणनीति तैयार की गई। पंजाब में, कांग्रेस पार्टी नशीले पदार्थों के सेवन और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को चुनाव के मुख्य विषयों के रूप में उजागर करना चाहती है।
चुनाव तैयारियों को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने के लिए, पंजाब में एक 'वॉर रूम' (जिसे 'कनेक्ट रूम' कहा जा रहा है) बनाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल को बेहतर बनाना है। इस बीच, लंच के दौरान सचिन पायलट, के.सी. वेणुगोपाल और अन्य वरिष्ठ नेता एक साथ बैठे, जिसका मकसद एकजुटता का संदेश देना था।
इसके अलावा, अकाली दल के नेता मिंटू बोहरा और पूर्व विधायक सुखदर्शन सिंह मरार के बेटे राज बलविंदर सिंह मरार कांग्रेस में शामिल हो गए। पार्टी को उम्मीद है कि इन संगठनात्मक बदलावों और एक एकजुट रणनीति से पंजाब में उसकी चुनावी स्थिति मजबूत होगी।