व्यापारी संगठन, CAIT (कैट) ने 'धिक्कार दिवस' मनाने की घोषणा की है। संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) का हवाला देते हुए, CAIT ने राहुल गांधी को याद दिलाया है कि विरोध करने का अधिकार किसी को भी दूसरों की आजीविका छीनने की छूट नहीं देता है।
कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर देश भर के व्यापारियों की नाराजगी जताई है। पिछले एक महीने से दिल्ली में राजनीतिक रैलियों, धरनों और विरोध प्रदर्शनों के कारण व्यापारिक गतिविधियों में बार-बार रुकावट आ रही है। CAIT ने इस पर गंभीर चिंता जताई है, खासकर 1 नवंबर को आयोजित रैली और पिछले एक महीने में विभिन्न समूहों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनों को कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों द्वारा दिए गए समर्थन को लेकर। इसे देखते हुए, CAIT ने 'धिक्कार दिवस' मनाने की घोषणा की है।
CAIT देश भर में 'धिक्कार दिवस' मनाएगा
CAIT ने कहा है कि वह राहुल गांधी की ओर से जवाब का इंतजार करेगा। हालांकि, दिवाली के तुरंत बाद, दिल्ली सहित देश भर के नेता एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर की बैठक में शामिल होंगे, जहां वे अपनी आगे की रणनीति तय करेंगे। यह अब केवल दिल्ली के व्यापारियों का मुद्दा नहीं रह गया है; अगर आज राजधानी में ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है, तो कल देश में कहीं भी ऐसा हो सकता है। इसलिए, यह एक गंभीर राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है। भारत के व्यापारी इतने कमजोर नहीं हैं कि वे ऐसी परिस्थितियों को लगातार सहते रहें—अब सबक सिखाने का समय आ गया है। CAIT ने देशव्यापी 'धिक्कार दिवस' मनाने की घोषणा की है, जिसकी तारीख नई दिल्ली में होने वाली आगामी बैठक में तय की जाएगी।
विरोध प्रदर्शनों से व्यापार पर बुरा असर
राहुल गांधी को लिखे पत्र में, CAIT के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया ने राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी, दोनों की राजनीतिक और नैतिक जिम्मेदारी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उनके समर्थन से किए गए इन विरोध प्रदर्शनों ने दिल्ली में आर्थिक गतिविधियों को बुरी तरह प्रभावित किया है। यह समय भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अभी त्योहारों का सीजन चल रहा है और शादियों से जुड़ी खरीदारी के लिए यह सबसे व्यस्त समय होता है। राहुल गांधी एक साथ दो विरोधाभासी रुख नहीं अपना सकते। एक तरफ, वे लोगों से स्थानीय बाजारों में खरीदारी करने की अपील करते हैं, तो दूसरी तरफ, वे ऐसे राजनीतिक आयोजनों और विरोध-प्रदर्शनों का समर्थन करते हैं जो ग्राहकों को उन्हीं बाजारों तक पहुंचने से रोकते हैं। CAIT के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक विरोधाभास नहीं है, बल्कि यह एक 'दोहरा मापदंड' है, जिसका सीधा असर आम व्यापारियों की आजीविका पर पड़ता है।
CAIT ने राहुल को संविधान की याद दिलाई
बी.सी. भरतिया ने आगे सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी का मानना है कि विरोध करने का अधिकार, व्यापार करने और आजीविका कमाने के अधिकार से ऊपर है? क्या संविधान का अनुच्छेद 19(1)(g) केवल भाषण देने या किताबों में लिखने के लिए है, या यह उन लाखों छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और कामकाजी परिवारों के अधिकारों की भी रक्षा करता है, जिनकी रोजी-रोटी उनकी रोज की कमाई पर निर्भर है? राजनीतिक नेता अपनी सुविधा के अनुसार चुनिंदा संवैधानिक प्रावधानों का इस्तेमाल नहीं कर सकते, जबकि वे दूसरों के अधिकारों की अनदेखी करें। गौरतलब है कि इससे पहले राहुल गांधी द्वारा आयोजित एक रैली में शामिल न होने के कारण यूथ कांग्रेस के 60 नेताओं को निलंबित कर दिया गया था।