मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1947 से 2017 तक ऊर्जा क्षेत्र सीमित क्षमता और अनियमित आपूर्ति से जूझता रहा। कुल उत्पादन क्षमता मात्र 12,000 मेगावाट थी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार (14 अगस्त) को विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन सदन को संबोधित करते हुए राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में अपनी सरकार की उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने 1947 से 2017 तक विपक्षी दलों के कार्यकाल की तुलना अपने साढ़े आठ साल (2017-2025) के कार्यकाल से की और ऊर्जा क्षेत्र में आए क्रांतिकारी बदलावों पर प्रकाश डाला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 से 2017 तक ऊर्जा क्षेत्र सीमित क्षमता और अनियमित आपूर्ति से जूझता रहा। कुल उत्पादन क्षमता मात्र 12,000 मेगावाट थी। यह उद्योग कृषि और घरेलू खपत की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त था, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहाँ बिजली की कमी के कारण सिंचाई, शिक्षा और छोटे उद्योग प्रभावित होते थे।
2017 से 2025 तक, योगी सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्युत उत्पादन क्षमता में 8000 मेगावाट की वृद्धि हुई है, जिससे अब कुल क्षमता 20,000 मेगावाट से अधिक हो गई है। 2016-17 में बिजली की अधिकतम माँग 16,000 मेगावाट थी। अब यह बढ़कर 33,000 मेगावाट हो गई है और सरकार इस दोगुनी से भी अधिक माँग को सफलतापूर्वक पूरा कर रही है।
जून 2025 तक 2.50 लाख मजरों का विद्युतीकरण - मुख्यमंत्री योगी
उन्होंने कहा कि ग्रामीण विद्युतीकरण में भी अभूतपूर्व सुधार हुआ है, जहाँ 2017 में 1.28 लाख मजरों की तुलना में जून 2025 तक 2.50 लाख मजरों का विद्युतीकरण किया गया। बिजली आपूर्ति समय में भी सुधार हुआ है, जिससे जिला मुख्यालयों में 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों में 21 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है। इसके अलावा, पिछले आठ वर्षों में बिजली के बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने के लिए 3 नए 765 केवी ट्रांसमिशन सबस्टेशन, 21 नए 400 केवी सबस्टेशन, 72 नए 220 केवी स्टेशन और 99 नए 132 केवी सबस्टेशन स्थापित किए गए। इन सुधारों से बिजली वितरण नेटवर्क विश्वसनीय बना।
खेती की लागत कम हुई और उत्पादकता बढ़ी - सीएम योगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल है जो अपने किसानों को सबसे ज़्यादा बिजली उपलब्ध कराते हैं, जिससे खेती की लागत कम हुई और उत्पादकता बढ़ी। साथ ही, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों से जुड़े कारोबारियों के जीवन स्तर में भी सुधार हुआ। यह बदलाव सिर्फ़ शहरी उद्योगों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण किसानों, छात्रों, छोटे दुकानदारों और घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुँच गया है। सीएम योगी ने ज़ोर देकर कहा कि उनकी सरकार ऊर्जा क्षेत्र में और सुधार के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे राज्य का समग्र विकास होगा।