- मां ने कहा था '98% अंक लाओगे तभी शूटिंग करने दूंगी', अब रोहतक की आशिमा ने कर दिखाया कमाल

मां ने कहा था '98% अंक लाओगे तभी शूटिंग करने दूंगी', अब रोहतक की आशिमा ने कर दिखाया कमाल

रोहतक की आशिमा अहलावत ने निशानेबाजी में देश का नाम रोशन किया। उन्होंने अपनी माँ की शर्त पर 10वीं कक्षा में 98.6% अंक प्राप्त करके खेलना शुरू किया। कज़ाकिस्तान में हुई एशियाई चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण और कांस्य पदक जीते।

रोहतक ज़िले के खरखड़ा गाँव की बेटी आशिमा अहलावत निशानेबाजी खेलकर देश का नाम रोशन करना चाहती थीं, लेकिन 10वीं कक्षा में उनकी माँ ने शर्त रखी कि वह उन्हें 98% अंक लाने पर ही निशानेबाजी खेलने देंगी। आशिमा का जुनून इतना था कि उन्होंने 10वीं कक्षा में 98.6% अंक प्राप्त किए और अपनी माँ से खेलने की अनुमति लेकर कड़ी मेहनत शुरू कर दी।

एशियाई चैंपियनशिप में लहराया तिरंगा

काफी मेहनत के बाद, उन्होंने कज़ाकिस्तान में हुई एशियाई चैंपियनशिप में देश का परचम लहराया। वहाँ आशिमा अहलावत ने टीम स्पर्धा में स्वर्ण और व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। यह पदक जीतने के बाद वह आज रोहतक पहुँचीं, जहाँ उनका स्वागत किया गया। खेलों के साथ-साथ आशिमा ने अपनी पढ़ाई भी नहीं छोड़ी और फिलहाल अर्थशास्त्र में एमए कर रही हैं।

ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना है लक्ष्य

आशिमा ने बताया कि वह पढ़ाई और खेल दोनों में कोई समझौता नहीं करती और दोनों में ही अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। इस जीत के लिए वह अपनी माँ, परिवार और कोच का शुक्रिया अदा कर रही हैं। क्योंकि उन्हें इस मुकाम तक पहुँचने में पूरा सहयोग मिला है। उनका लक्ष्य अगले साल होने वाले एशियाई खेलों और फिर ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना है।

माँ सुमित्रा अहलावत ने क्या कहा

माँ सुमित्रा अहलावत ने बताया कि बेटी का इरादा खेलों में देश का नाम रोशन करने का था, लेकिन यह बहुत महंगा खेल था, इसलिए उन्होंने बेटी के सामने दसवीं की परीक्षा में 98% अंक लाने की शर्त रखी और खेलों के प्रति उनका ऐसा जुनून था कि उन्होंने दसवीं में 98.6% अंक हासिल किए और खेलों में कदम रखा। आज वह अपनी बेटी की इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं और उम्मीद करती हैं कि आशिमा ओलंपिक में भी देश के लिए पदक जीते।

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