नक्सली हिंसा के पीड़ितों ने सांसदों से उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी का समर्थन न करने की अपील की है। उनका आरोप है कि रेड्डी के सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने सलवा जुडूम को खत्म कर दिया, जिससे नक्सलवाद बढ़ा और निर्दोष लोग मारे गए।
नक्सली हिंसा के पीड़ितों ने शुक्रवार को संसद के सभी सांसदों से विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी का समर्थन न करने की भावुक अपील की। बस्तर शांति समिति (बीएसएस) के बैनर तले इन लोगों ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और आरोप लगाया कि रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट के जज रहते हुए सलवा जुडूम को खत्म करने का आदेश देकर नक्सलियों के खिलाफ उनकी लड़ाई को कमजोर किया, जिससे उनकी जिंदगी तबाह हो गई।
सलवा जुडूम पर प्रतिबंध के कारण नक्सली ताकतवर हुए
बस्तर शांति समिति के संयोजक जयराम ने कहा, 'जब सलवा जुडूम ने ताकत हासिल की, तब नक्सली इतने कमजोर हो गए थे कि उनका सफाया होने वाला था। लेकिन रेड्डी साहब के सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने नक्सलियों को फिर से हिम्मत दी।' इसी वजह से नक्सलवाद नासूर बन गया।' उन्होंने बताया कि सलवा जुडूम के तहत छत्तीसगढ़ सरकार ने आदिवासी युवाओं को विशेष पुलिस अधिकारी बनाकर नक्सलियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। लेकिन 2011 में सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस रेड्डी भी शामिल थे, ने इसे गैरकानूनी और असंवैधानिक करार दिया और सलवा जुडूम को तुरंत बंद करने और हथियार ज़ब्त करने का आदेश दिया।
नक्सलियों ने मेरे बेटे को मार डाला: शियाराम
बस्तर के एक ग्रामीण शियाराम रामटेक ने दुखी होकर कहा, 'अगर रेड्डी साहब ने नक्सलियों का साथ न दिया होता, तो मेरा बेटा आज ज़िंदा होता।' शियाराम का बेटा एक किसान था, जिसका कथित तौर पर नक्सलियों ने अपहरण कर हत्या कर दी थी। एक अन्य पीड़ित केदारनाथ कश्यप ने बताया कि नक्सलियों ने उनके छोटे भाई, जो एक पुलिस कांस्टेबल था, की बेरहमी से हत्या कर दी। उन्होंने आँखों में आँसू भरकर कहा, 'नक्सलियों ने मेरे भाई को प्रताड़ित किया और फिर बेरहमी से मार डाला। अगर सलवा जुडूम न रोका जाता, तो 2014 तक नक्सली हमारे इलाके से भाग गए होते और मेरा भाई आज मेरे साथ होता।'
नक्सली हिंसा ने छीन ली ज़िंदगी की खुशियाँ
पीड़ितों ने कहा कि नक्सली हिंसा ने उनकी ज़िंदगी बर्बाद कर दी। किसी ने आईईडी विस्फोट में अपने पैर गँवा दिए, किसी की आँखों की रोशनी चली गई, किसी की रीढ़ की हड्डी टूट गई, तो कोई हमेशा के लिए विकलांग हो गया। उन्होंने कहा, 'जिस व्यक्ति ने सलवा जुडूम को खत्म करने का आदेश दिया था, उसे अब उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया है। यह हमारे ज़ख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।'
'किसी राजनीतिक विचारधारा से कोई संबंध नहीं'
बस्तर शांति समिति ने स्पष्ट किया कि उनका किसी राजनीतिक दल या विचारधारा से कोई लेना-देना नहीं है, और वे केवल न्याय चाहते हैं। उन्होंने सभी सांसदों से सुदर्शन रेड्डी का समर्थन न करने की अपील की। एक बयान में उन्होंने कहा, 'हमारा दर्द सुनिए, हमारी पुकार सुनिए, नक्सल पीड़ितों के लिए अपनी आवाज़ उठाइए। हमारे दुख को समझिए, हमारी यादों का सम्मान कीजिए और हमारे संघर्ष को पहचानिए।' आपको बता दें कि उपराष्ट्रपति पद का चुनाव 9 सितंबर को होगा। बी. सुदर्शन रेड्डी विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार हैं, जबकि सत्तारूढ़ एनडीए ने सी. पी. राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया है।