टी-सीरीज़ म्यूज़िक कंपनी के मालिक गुलशन कुमार के हत्यारों में से एक अब्दुल मर्चेंट की मौत हो गई है। अब्दुल, जो लंबे समय से जेल में था, 60 साल की उम्र में गुज़र गया।
गुलशन कुमार हत्याकांड में उम्रकैद की सज़ा काट रहे 60 साल के अब्दुल रऊफ मर्चेंट की जेल में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि अब्दुल की तबीयत काफी समय से खराब थी। हाल ही में दिल का दौरा पड़ने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रऊफ को 30 दिसंबर, 2025 को हल्का दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद उसे शहर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद 4 जनवरी, 2026 को तबीयत में काफी सुधार होने के बाद उसे वापस जेल भेज दिया गया था। हालांकि, गुरुवार सुबह उसे फिर से गंभीर दिल का दौरा पड़ा और उसकी मौत हो गई। आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया गया है।
गुलशन कुमार की हत्या कैसे हुई थी?
12 अगस्त, 1997 को गुलशन कुमार की दक्षिण अंधेरी में जितेश्वर महादेव मंदिर के बाहर दिन दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। गुलशन, जो बिना बॉडीगार्ड के मंदिर में पूजा करने गए थे, उन पर तीन हमलावरों ने 16 गोलियां चलाईं। रऊफ उन तीन हमलावरों में से एक था। इस घटना में उसके ड्राइवर को भी गोली लगी थी। गुलशन की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई थी।
विवाद क्या था?
गुलशन कुमार की हत्या को सिर्फ़ कारोबारी विवाद नहीं माना गया, बल्कि इसे अंडरवर्ल्ड द्वारा आतंक और नियंत्रण स्थापित करने की साज़िश से जोड़ा गया। 1990 के दशक में मुंबई अंडरवर्ल्ड का फ़िल्म और संगीत इंडस्ट्री पर गहरा असर था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, टी-सीरीज़ के मालिक से फिरौती मांगी गई थी, जिसे उन्होंने मना कर दिया था। इस मामले में रऊफ को 2002 में उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई और 2003 में उसे हरसूल जेल भेज दिया गया।
बाद में, रऊफ को 2009 में पैरोल पर रिहा किया गया, लेकिन जेल से रिहा होने के बाद वह कथित तौर पर फरार हो गया। लगभग आठ साल तक फरार रहने के बाद, उसे 2016 और 2017 के बीच फिर से गिरफ्तार किया गया और हरसूल जेल वापस भेज दिया गया।