- 'क्या भारत किसी का गुलाम है, उनकी हिम्मत...' अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीदने की छूट दिए जाने पर ओवैसी भड़के

'क्या भारत किसी का गुलाम है, उनकी हिम्मत...' अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीदने की छूट दिए जाने पर ओवैसी भड़के

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने US की पॉलिसी और सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भारत किसी देश का गुलाम नहीं है और इसकी सॉवरेनिटी से कोई समझौता नहीं हो सकता।

हैदराबाद के MP और AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने एक भाषण में US की पॉलिसी और केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भारत किसी देश का गुलाम नहीं है और इसकी सॉवरेनिटी से कोई समझौता नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि US के एक मिनिस्टर ने भारत आकर बयान दिया कि वे भारत को चीन की तरह नहीं बनने देंगे, जो भारत की इज्ज़त के खिलाफ है। ओवैसी ने सवाल किया कि भारत की तरक्की में अमेरिका का क्या रोल रहा है, और पूछा कि अगर कोई विदेशी लीडर ऐसे कमेंट करता है, तो भारत सरकार को जवाब देना चाहिए।

ओवैसी ने US के तेल खरीदने की इजाज़त देने पर नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा, "मैं BJP और RSS से पूछना चाहता हूं कि ट्रंप के मिनिस्टर की हिम्मत कैसे हुई कि उन्होंने हमें तेल खरीदने का टाइम दिया?" वे हमें हुक्म देने वाले कौन होते हैं? वे इस पर चुप क्यों हैं? यह हमारे देश की सॉवरेनिटी का सवाल है। दूसरों से तेल खरीदना पूरी तरह से हमारी अपनी मर्ज़ी होनी चाहिए।

ओवैसी ने क्या कहा?

अपनी स्पीच में ओवैसी ने कहा कि कुछ पॉलिटिकल पार्टियां मुस्लिम मुद्दों पर तो खुलकर बयान देती हैं, लेकिन यूनाइटेड स्टेट्स या डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेताओं पर कमेंट करने से बचती हैं। उन्होंने मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे कुछ लोग उनके खिलाफ बोलने से डरते हैं। ओवैसी ने कहा कि भारत को किसी विदेशी ताकत के आगे झुकने की ज़रूरत नहीं है और सरकार को देश के हितों पर साफ स्टैंड लेना चाहिए।

सरकार पर निशाना साधते हुए

इंटरनेशनल पॉलिटिकल और सिक्योरिटी सिचुएशन का ज़िक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि मॉडर्न लड़ाई के तरीके तेज़ी से बदल रहे हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज $20,000 का एक ड्रोन अरबों डॉलर की मिलिट्री टेक्नोलॉजी को खत्म कर सकता है, इसलिए भारतीय डिफेंस एक्सपर्ट्स और पॉलिसी बनाने वालों को गंभीरता से नई स्ट्रैटेजी पर सोचना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भारत के समुद्री इलाके के पास विदेशी मिलिट्री गतिविधियां होती हैं और सरकार चुप रहती है, तो इससे भविष्य में बड़े सिक्योरिटी खतरे पैदा हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि हथियार बनाने वाली कंपनियों को अक्सर ग्लोबल झगड़ों से सबसे ज़्यादा फायदा होता है। युद्ध के दौरान नए हथियारों और डिफेंस सिस्टम की मांग बढ़ जाती है, और यह आर्थिक फायदा कई देशों की पॉलिसी पर असर डालता है। ओवैसी ने कहा कि दुनिया भर में हो रही कई लड़ाइयों के पीछे हथियार इंडस्ट्री का भी बड़ा आर्थिक फायदा है।

"देश के सामने असली खतरे को समझना ज़रूरी है"

ओवैसी ने कहा कि देश के सामने असली खतरे को समझना ज़रूरी है और पॉलिटिकल पार्टियों को नफरत की पॉलिटिक्स छोड़कर नेशनल सिक्योरिटी और आर्थिक ताकत पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसकी आज़ाद पॉलिसी और उसके लोगों की एकता में है, और किसी भी विदेशी ताकत को यह मैसेज दिया जाना चाहिए कि भारत अपना रास्ता खुद बनाएगा।

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